जीएसटी 2.0 : टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव, 28% GST हटेगा। आम आदमी और लग्ज़री मार्केट पर असर

भारत में जीएसटी व्यवस्था लागू हुए लगभग 8 वर्ष हो चुके हैं। अब केंद्र सरकार ने जीएसटी 2.0 का खाका तैयार कर लिया है। इस नए ढांचे का मकसद कर संरचना को सरल बनाना और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ पहुंचाना है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों पर अलग ढंग से पड़ेगा—जहाँ आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलेगी, वहीं लग्ज़री वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें और बढ़ेंगी।

छोटे वाहनों पर राहत, लग्ज़री गाड़ियों पर बोझ

नए प्रस्ताव के अनुसार, छोटी कारों पर वर्तमान में लागू 28% जीएसटी और 1-3% सेस की दर घटाकर 18% करने की योजना है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में छोटी कारें और सस्ती हो जाएँगी।

दूसरी ओर, मिड-साइज और लग्ज़री गाड़ियों पर टैक्स का बोझ बढ़ने वाला है।

  • मिड-साइज कारें, जिन पर अभी 43% टैक्स (28% जीएसटी + 15% सेस) लगता है, पर टैक्स घटकर 18% रह जाएगा।
  • एसयूवी और बड़ी गाड़ियाँ, जिन पर 50% तक टैक्स लगता है, उनकी श्रेणी में बदलाव कर टैक्स दर को 18% किया जाएगा।
  • वहीं, 350 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिलों पर भी टैक्स दर घटकर 18% कर दी जाएगी।

जीएसटी 2.0 में क्या बदलाव होंगे? (संभावित)

  1. छोटी कारें सस्ती – पहले 28% जीएसटी + 1-3% सेस लगता था, अब इसे 18% करने का प्रस्ताव।
  2. मिड-साइज और एसयूवी कारें – पहले 43%–50% टैक्स, अब घटकर 18% प्रस्तावित।
  3. 350 सीसी से ऊपर की बाइकें – पहले 28% टैक्स, अब सिर्फ 18%
  4. सोना, चांदी और हीरे – टैक्स पहले जैसा ही रहेगा।
  5. होटल, शिक्षा और कृषि सेवाएँ – 0% और 5% जीएसटी स्लैब खत्म होने से कीमतें बढ़ सकती हैं।

यह बदलाव ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई रफ्तार ला सकता है। छोटे और मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदना सस्ता होगा, जबकि लग्ज़री कार बाजार में कीमतें बढ़ने से मांग थोड़ी प्रभावित हो सकती है।

भारत में जीएसटी (Goods and Services Tax) 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ था।

👉 इसे “वन नेशन, वन टैक्स” (एक देश, एक कर) के रूप में जाना जाता है।
👉 जीएसटी ने केंद्र और राज्य सरकारों के अलग-अलग अप्रत्यक्ष कर जैसे एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, एंट्री टैक्स, लक्ज़री टैक्स, ऑक्ट्रॉय आदि को खत्म करके एक ही टैक्स व्यवस्था लागू की।

भारत सरकार को जीएसटी (Goods and Services Tax) से प्रतिवर्ष होने वाली आमदनी (GST revenue) का विवरण निम्नलिखित है:


वार्षिक जीएसटी संग्रह — आंकड़ों में

1. वित्तीय वर्ष 2024–25 (FY 25)

  • ग्रॉस जीएसटी संग्रह: ₹22.08 लाख करोड़
    यह पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक और नए रिकॉर्ड की गई राशि है। The Times of IndiaThe Economic Times
  • वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि: 9.4%
    (FY 24 की तुलना में) The Economic Times+1
  • औसत मासिक संग्रह: ₹1.84 लाख करोड़ The Economic Times

2. वित्तीय वर्ष 2023–24 (FY 24)

  • ग्रॉस जीएसटी संग्रह: लगभग ₹20.1 लाख करोड़ Reuters
  • मासिक औसत संग्रह: ₹1.68 लाख करोड़ Reuters

सारांश तालिका

वित्तीय वर्षग्रॉस जीएसटी संग्रहसालाना वृद्धिऔसत मासिक संग्रह
FY 24₹20.1 लाख करोड़₹1.68 लाख करोड़
FY 25₹22.08 लाख करोड़+9.4%₹1.84 लाख करोड़

सोना, चांदी और हीरे पर टैक्स पहले जैसा

कीमती धातुओं और रत्नों को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोना, चांदी और हीरे पर वही पुरानी जीएसटी दरें लागू रहेंगी। यानी इस सेक्टर में ग्राहकों को न तो कोई अतिरिक्त राहत मिलेगी और न ही कोई नया बोझ।

होटल, कृषि और शिक्षा सेवाओं पर असर

अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली तक 0% और 5% जीएसटी स्लैब पूरी तरह खत्म हो सकता है। इसके बाद होटल, कृषि और शिक्षा क्षेत्र की सेवाओं पर भी टैक्स ढांचा बदलने की संभावना है। इससे जहाँ सरकार को राजस्व बढ़ाने का फायदा होगा, वहीं इन सेवाओं का उपभोग करने वाले लोगों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।

राज्यों की भूमिका और राजनीति

दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार को भरोसा है कि गैर-भाजपा शासित राज्य भी इस प्रस्ताव का विरोध नहीं करेंगे। जीएसटी परिषद में आम सहमति से निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि केंद्र राज्यों को विशेष मुआवजा देने का प्रावधान कर सकता है।

आम जनता पर सीधा असर

  • फायदा : छोटी कार खरीदना आसान और सस्ता होगा।
  • नुकसान : लग्ज़री गाड़ियाँ, होटल और उच्चस्तरीय सेवाएँ महँगी होंगी।
  • कोई बदलाव नहीं : सोना-चांदी और हीरे की कीमतों पर जीएसटी का असर नहीं पड़ेगा।

निष्कर्ष

जीएसटी 2.0 को एक बड़े आर्थिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसका लक्ष्य कर प्रणाली को सरल बनाना और राजस्व में संतुलन लाना है। जहाँ यह आम जनता के लिए राहत लेकर आएगा, वहीं लग्ज़री सेक्टर और उच्चस्तरीय सेवाओं पर अतिरिक्त भार डालेगा। आने वाले महीनों में इस पर अंतिम निर्णय होगा और इसका असर दिवाली के बाद से बाजार में साफ दिखाई देने लगेगा।

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